Thursday, August 8, 2024

जनाबे ज़ैद शहीद
इमाम सज्जाद (अ.स.) की औलाद में हज़रत इमाम मोहम्मद बाक़िर (अ.स.) के बाद सब से नुमाया हैसियत जनाबे ज़ैद शहीद की है। आप 80 हिजरी में पैदा हुये। 121 हिजरी में हश्शाम बिन अब्दुल मलिक से तंग आ कर आप अपने हम नवा तलाश करने लगे और पहली सफ़र 122 हिजरी को चालीस हज़ार (40000) कूफ़ीयों समैत मैदान में निकल आये। ऐन मौक़ा ए जंग में कूफ़ीयों ने साथ छोड़ दिया। बाज़ मआसरीन लिखते हैं कि कूफ़ीयों के साथ छोड़ने का सबब इमाम अबू हनीफ़ा की नकस बैअत है क्यों कि उन्होंने पहले जनाबे ज़ैद की बैअत की थी फिर जब हश्शाम ने आपको दरबार में बुला कर इमामे आज़म का खि़ताब दिया तो यह हुकूमत के साथ हो गये और उन्होंने ज़ैद की बैअत तोड़ दी। इसी वजह से उनके तमाम मानने वाले उन्हें छोड़ कर अलग हो गये। उस वक़्त आपने फ़रमाया ‘‘ रफ़ज़त मूनी ’’ ऐ कूफी़यों ! तुम ने मेरा साथ छोड़ दिया। इसी फ़रमाने की वजह से कूफ़ीयों को राफ़ज़ी कहा जाता है। जहां उस वक़्त चंद अफ़राद के सिवा कोई भी शिया न था सब हज़रते उस्मान और अमीरे माविया के मानने वाले थे। ग़रज़ के दौराने जंग में आपकी पेशानी पर एक तीर लगा जिसकी वजह से आप ज़मीन पर तशरीफ़ लाये यह देख कर आपका एक ख़ादिम आगे बढ़ा और उसने आपको उठा कर एक मकान में पहुँचा दिया। ज़ख़्म कारी था, काफ़ी इलाज के बवजूद जां बर न हो सके फिर आपके ख़ादिमों ने ख़ुफ़िया तौर पर आप को दफ़्न कर दिया और क़ब्र पर से पानी गुज़ार दिया ताकि क़ब्र का पता न चल सके लेकिन दुश्मानों ने सुराग लगा कर लाश क़ब्र से निकाल ली और सर काट कर हश्शाम के पास भेजने के बाद आपके बदन को सूली पर लटका दिया। चार साल तक यह जिस्म सूली पर लटका रहा। ख़ुदा की क़ुदरत तो देखिये उसने मकड़ी को हुक्म दिया और उसने आपके औरतैन (पोशीदा मक़ामात) पर घना जाला तान दिया। (ख़मीस जिल्द 2 पृष्ठ 357 व हयातुल हैवान) चार साल के बाद आपके जिस्म को नज़रे आतश कर के राख दरियाए फ़रात में बहा दी गई। (उमदतुल मतालिब पृष्ठ 248) शहादत के वक़्त आपकी उम्र 42 साल की थी। हज़रत ज़ैद शहीदे अज़ीम मनाक़िब व फ़ज़ाएल के मालिक थे। आपको ‘‘ हलीफ़ अल क़ुरआन ’’ कहा जाता था। आप ही की औलाद को ज़ैदी कहा जाता है और चूंकि आपका क़याम बा मक़ाम वासित था इस लिये बाज़ हज़रात अपने नाम के साथ ज़ैदी अल वास्ती लिखते हैं। तारीख़ इब्नुल वरदी में है कि 38 हिजरी में हज्जाज बिन यूसुफ़ ने शहरे वासित की बुनियाद डाली थी। जनाबे ज़ैद के चार बेटे थे जिनमें जनाबे याहया बिन ज़ैद की शुजाअत के कारनामे तारीख़ के अवराख़ में सोने के हुुरूफ़ से लिखे जाने के क़ाबिल हैं। आप दादहियाल की तरफ़ से हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और नानिहाल की तरफ़ से जनाबे मोहम्मद बिन हनफ़िया की यादगार थे। आपकी वालेदा का नाम ‘‘ रेता ’’ था जो मोहम्मद बिन हनफ़िया की पोती थीं। नसले रसूल (स. अ.) में होने की वजह से आपको क़त्ल करने की कोशिश की गई। आपने जान के तहफ़्फ़ुज़ के लिये यादगार जंग की। बिल आखि़र 125 हिजरी में आप शहीद हो गये। फिर वलीद बिन यज़ीद बिन अब्दुल मलिक के हुक्म से आपका सर काटा गया और हाथ पाओं काटे गये। उसके बाद लाशे मुबारक सूली पर लटका दी गई फिर एक अरसे के बाद उसे उतार कर जलाया गया और हथौड़े से कूट कूट कर रेज़ा रेज़ा किया गया फिर एक बोरे में रख कर कशती के ज़रिये से एक एक मुठ्ठी राख दरियाए फ़रात की सतह पर छिड़क दी गई। इस तरह इस फ़रज़न्दे रसूल (स. अ.) के साथ ज़ुल्मे अज़ीम किया गया। 1. उन्होंने सलतनते हश्शाम में दावा ए खि़लाफ़त किया था बहुत से लोगों ने बैअत कर ली थी। तदाएन, बसरा

Thursday, June 7, 2018

हज़रत अली अलैहिस्सलाम पैगंबर मोहम्मद साहब के चचेरे भाई एवं दामाद थे l सुन्नी समुदाय के लोग हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना चौथा खलीफा मानते हैं और शिया समुदाय के लोग अपना पहला इमाम मानते हैं l हज़रत अली अलैहिस्सलाम का एक खलीफा के तौर पर शासन काल 4 साल का था जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव कोफी अन्नान के द्वारा इस्लाम का स्वर्ण युग घोषित किया गया है l  हज़रत अली अलैहिस्सलाम के शासनकाल में गरीब -अमीर , मालिक - गुलाम , मर्द - औरत , मुस्लिम - गैर मुस्लिम सबसे समरूपता से पेश आया जाता था और सब को बराबर का दर्जा दिया जाता था l हजरत अली के शासनकाल में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोया l हजरत अली इतने बड़े इस्लामी राज्य के खलीफा थे परंतु वे कभी महलों में नहीं रहे l वह प्रजा  के बीच एक मामूली से घर में रहते थे जो कि आज भी इराक के नगर कूफा में मौजूद है l हजरत अली की अर्थनीति एवं कानून व्यवस्था इतने उच्च श्रेणी की थी कि जब वह अपना निजी कार्य करते थे तो सरकारी चिराग भी हटा देते थे और अपने घर से अपना निजी चिराग मंगवाते थे l इससे हजरत अली ने यह संदेश दिया कि खलीफा हो या सामान्य व्यक्ति ईश्वर की दृष्टि में सब एक समान है  किसी को अपने ओहदे का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए l हज़रत अली अलैहिस्सलाम रात के अंधेरे में गरीबों के घरों में खाने की थैलियां पहुंचाया करते थे  l हज़रत अली अलैहिस्सलाम बच्चों से बहुत प्रेम करते थे खासतौर पर अनाथ बच्चों से l जब भी किसी अनाथ बच्चे को कोई परेशानी होती थी तो वह सीधे हज़रत अली अलैहिस्सलाम के पास जाता था l हज़रत अली अलैहिस्सलाम अनाथ बच्चों को अपनी गोदी में बैठाकर अपने हाथों से खाना खिलाया करते थे l इसी कारण उन्हें "अबुल अइताम" कहा जाता है जिसका अर्थ होता है अनाथों का पिता l मुसलमानों से ज्यादा गैरमुसलमान हज़रत अली अलैहिस्सलाम से प्रेम करते थे l जब हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत हुई तब एक यहूदी  तड़प तड़प कर रोने लगा लोगों ने उससे पूछा तो उसने बताया कि एक बार मैं बसरे से अपने कबीले आ रहा था और मेरे साथ एक सज्जन थे जिन्हें कूफा जाना था रास्ते में मेरी उनसे बहुत अच्छी दोस्ती हो गई कुछ देर बाद मेरा और उनका रास्ता अलग हो गया मुझे अपने कबीले जाना था और उन्हें कूफा जाना था परंतु मैंने देखा कि वह मेरे साथ साथ चल रहे हैं मैंने उनसे प्रश्न किया कि आपको तो कूफा जाना है आप मेरे साथ क्यों चल रहे हैं तो उन्होंने कहा कि यह मेरे नबी की शिक्षाओं में से है कि अगर किसी के साथ यात्रा कर रहे हो तो उसे तब तक मत छोड़ो जब तक उसकी अनुमति ना हो l उन सज्जन ने मुझे मेरे घर तक पहुंचाया तब वे लौटे l बाद में मेरे कबीले के एक व्यक्ति ने मुझसे पूछा कि जिन सज्जन के साथ तुम आए हो क्या तुम उन्हें जानते हो तो मैंने उत्तर दिया नहीं l तब मेरे कबीले के उस व्यक्ति ने बताया कि यह इस्लामिक राज्य के खलीफा हज़रत अली अलैहिस्सलाम है l हज़रत अली अलैहिस्सलाम की इन्हीं सब खूबियों पर समाज के भ्रष्ट लोग उनसे नफरत करने लगे और उनकी हत्या का मंसूबा बनाने लगे l पहले उन लोगों ने हजरत अली को गृह युद्ध में फसाया परंतु  हजरत अली अलैहिस्सलाम ने प्रेम और अच्छाई के द्वारा उस ग्रह युद्ध को समाप्त किया l फिर समाज के भ्रष्ट व्यक्तियों ने इब्ने मुलजिम नामक एक व्यक्ति को खरीदा और उससे कहा कि वह हजरत अली अलैहिस्सलाम की हत्या कर दे l 19 रमजान की सुबह  हजरत अली कूफे की मस्जिद में सुबह की नमाज पढ़ा रहे थे जैसे ही वह सजदे में गए तभी इब्ने मुलजिम नें जहर में डूबी हुई तलवार से हज़रत अली अलैहिस्सलाम पर ऐसा प्रहार किया कि वे  बुरी तरह जख्मी हो गए  l जब हकीम को बुलाया गया तो उसने कहा कि जहर पूरे शरीर में फैल गया है अब यह बच नहीं सकते आप लोग इन्हें ज्यादा से ज्यादा दूध पिलाइए इससे इन को राहत मिलेगी l जब हज़रत अली अलैहिस्सलाम के सामने दूध लाया गया तो उन्होंने अपने बेटे इमाम हसन से कहा कि बेटा इसे इब्ने मुलजिम को पिला दो वह प्यासा है बार बार अपने होठों पर जबान फेर रहा है l इब्ने मुलजिम के हमले से हज़रत अली अलैहिस्सलाम के पूरे शरीर में जहर फैल चुका था जिसके कारण उनकी 21 रमजान को शहादत हो गई l हर साल 21 रमजान को हज़रत अली अलैहिस्सलाम के चाहने वाले शोक मनाते हैं जुलूसों एवं मजलिसों का आयोजन करते हैं l

Friday, October 24, 2014

Thursday, January 20, 2011

A Socity of Indian Muslim's

Aaj shab-e-Shahadat
(13-Safar-1432H)
H.Sakina binte Husain (a.s)
...
Allahummal'an Qatalatal H. Sakina Binte Husain(a.s)
.
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I.ALI NAQI(as):DUNIYA me log apni DAULAT k zariye IZZATDAAR BANTE hai aur (par)AAKHERAT me NEQ AMAL ki wajah se unki IZZAT ki jhaayegi"
SLW




I.Reza(as)-Agr tum I.Husain(a) pe itna roye k tumhare gaal pr se ansu bahe to Allah tumse huwe sab gunah maf krega chahe wo chote ho ya bade






H.ALI (a.s)
JAB TUM KOI DOST BANAO TO APNE DIL ME Ek KABRASTAN BHI BANA LIYA KARO AUR USME APNE DOST KI TAMAM BURAIYAN DAFAN KAR DIYA KARO.,






7-Safar-1431 Hijri
Wiladat
I. Musa Qazim (a.s)
Allahummal'an Qatalatal
I Musa Qazim (a.s)
(slwt)
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9219592195.






..2/2
kadam badate hue Guzrege k unke chehre Roshan or Norani hoge or Bagair hisab k Jannat me dakhil ho jayege
(Bahar Ul Anwar Vol-6 P-192)




Rasul(saw):
Ay Husain (a.s) tumhari nasl se ek farzand paida hoge
Jinhe Zaid kaha jayega
Wo or unke sathi kayamat k din logo se aage
..1/2





I.Reza(a.s):
Malayeka har sall 10 Muharram ko mere jad I.Husain(a.s) k gum main apni barehna kamar pe talwar ki zarb lagate hai
(B.A-J-104 P






Rasul(sww);
woh log lanat k kabil hai
1.Jo bin bulaye kisi k yaha kahane me shareeq ho jaye
(salwat)
:
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.






Aaj shab-e-Shahadat
I Zain-ul-Abideen (a.s)
(25-Muharram-
95 Hijri )
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+919756520786






Rasulallah(sw)-Buland aawaz mey dua maango kyunki ye insaan ko munafeqat sey dur rakhti hai
(salwat);
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I.HUSAIN (a.s); JAB TUM JAANLO KE HAQ PAR HO TO JAAN KI PARWAH KARO NA MAAL KI,
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9219592195
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+919756520786









I.SADIQ{A.S}-JOOTHI KASAM USKE SAATH GARIBI AUR BHUK{HUNGER} LEKAR AATI HAI
....
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+919756520786







H.Ali (a.s)- Yeh duniya ek aisa ghar hai jo bala'on main ghera huwa aur fareb karo'n main shoorat yafta hai.
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H.Ali(a.s):
Kisi Ko Nek Bat Batana Khamosh Rehne se Zyada Behtar Hai Aur Kisi Ko Buri Bat Batane se Khamosh Rehna Zyada Behtar Hai
(salwat).

p

Monday, December 8, 2008

Ab seThori der me majalis wa Ziyarat-e-Tabot
H Muslim bin Aqeel hoge
Jama-E-Mehdia Hall
Saithal
Khatib-Mohd Aalim Sahab
Muzf Ngr
Time:: 9AM 16 hours ago
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Aaj ek majalis wa Ziyarat-e-Tabot
H Muslim bin Aqeel
Jama-E-Mehdia Hall
Saithal
Khatib-Mohd Aalim Sahab
(Muzaffar Nagar)
Time:: 9AM
.....
.. 17 hours ago
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Kal ek majalis ba silsile Shahadat
H Muslim bin Aqeel
bad Namaz-e-fazr
JARIELY me hogi
Khatib=
M.Muqtada Rizvi
htp//:shiapoint.blogspot.com 1 day ago
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Aaj shahadat Hazrat Muslim bin akeel
or
aaj hi Imam Husain(a.s)
Ne Makka se apna safar Karbobla k liye shuru kiya jo 2 Moharram ko khatm hua 1 day ago
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Aaj ek Majalis ba silsile Fatiha_khani
Taskeen Zehra
Binte Israr Husain
Khatib_J M Mubeen Hasain
I.B-Kalan
Time:3PM
Request:
Surhe Fatiha 1 day ago

जनाबे ज़ैद शहीद इमाम सज्जाद (अ.स.) की औलाद में हज़रत इमाम मोहम्मद बाक़िर (अ.स.) के बाद सब से नुमाया हैसियत जनाबे ज़ैद शहीद की है। आप 80 हि...